Tuesday, October 27, 2009

अजनबी आवाज़

एक आवाज़ जो बुलंद है
एक आवाज़ तो हजारों में सुने
एक आवाज़ जो हकीकत है
जो बातों में दिखे
एक आवाज़ जो अपने हक के लिए लड़े
खड़े हो जब सीना तान कर
एक आवाज़ जो चिलाये
जिसमे लगें हो हजारों पर
एक आवाज़ जो पूछे
हजारों सवालों के जवाब
एक आवाज़ जो करदे सच
हजारों आंखों के खवाब
एक आवाज़ जो गूंजे पहाडों में
और कूदे नदी की लहरों पर
एक आवाज़ जो सुने जंगल में
भीड़ में भी हो उसका घर
क्या वो आवाज़ तुम्हारी है
जो सुन रही है अभी
खोजते हो क्यों इसे
कभी ना थी यह अजनबी






2 comments:

Unknown said...

This one was written post the Mumbai attacks!

Id it is said...

What a beautiful way to commemorate!