Thursday, September 18, 2008

यादें

कभी एक मीठा लम्हा

और बन जाती है एक याद

तो कभी वोह कढ़वी बात

जो छोड़ती नही है साथ

एक गुब्बारे में जैसे बंद जिंदगी

हवा के झोंके के सहारे

बेमतलब की उड़ान

तोड़एगी काइसे वोह तारे

यादों के गुब्बारे से आगे बढ़

और ज़िन्दगी को उड़ान भरने दे

डिब्बी में बंद कर इन्हे

मेरे कदम बदने दे

कभी पेड़ भी मुरझाये फूल की याद में

फूल देना बंद करता है

या सूरज अंधेरे से डर कर

किरणों को बाँहों में समेत लेता है

यादें तो पानी की लहर है

किनारे पर जो टूट जाती

नदी फिर चल अपनी राह पर

नई लहरों को संजोती आती

मन ज़िन्दगी का पहलू है यादें

अस्तित्व मत अपना बना इन्हे

Sunday, September 7, 2008

तोहफे

सूखे पते की सरसराहट
तितली का फूल से मिलना
हरी घास की चादर पर
हजारों जिन्दिगियों का जीना
हवा के झोंके के साथ
हर पल एक गीत गाना
और नदी की लहरों का
साहिल से टकराना
एक गिरते पते की
बेमतलब की उड़ान
हवा के रुख में जैसे
बसी है उसकी जान
इन तोहफों के साथ
हर पल को जीना
हाथों के प्यालों में लेकर
ज़िन्दगी को पीना