सूखे पते की सरसराहट
तितली का फूल से मिलना
हरी घास की चादर पर
हजारों जिन्दिगियों का जीना
हवा के झोंके के साथ
हर पल एक गीत गाना
और नदी की लहरों का
साहिल से टकराना
एक गिरते पते की
बेमतलब की उड़ान
हवा के रुख में जैसे
बसी है उसकी जान
इन तोहफों के साथ
हर पल को जीना
हाथों के प्यालों में लेकर
ज़िन्दगी को पीना
1 comment:
This is beautiful! You should write more!
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