Sunday, September 7, 2008

तोहफे

सूखे पते की सरसराहट
तितली का फूल से मिलना
हरी घास की चादर पर
हजारों जिन्दिगियों का जीना
हवा के झोंके के साथ
हर पल एक गीत गाना
और नदी की लहरों का
साहिल से टकराना
एक गिरते पते की
बेमतलब की उड़ान
हवा के रुख में जैसे
बसी है उसकी जान
इन तोहफों के साथ
हर पल को जीना
हाथों के प्यालों में लेकर
ज़िन्दगी को पीना

1 comment:

Unknown said...

This is beautiful! You should write more!