Monday, August 11, 2008

Lamhe

सेहर- हर रोज एक नई सुबह,
खिलता एक नया आसमान;
सतरंगी किरणें मुझे जगाती हैं,
तोहफे में लाती एक नया लम्हा;
हंसकर इस सतरंगी लम्हे को मै समेत लेती हूँ,
पर क्या लम्हे भी हाथों में रुकते हैं;
हर पल हाथों से लम्हा गिरता है,
उठाने के लिए जो हम झुकते हैं;
पाते हैं लम्हों के निशान,
हँसी की गूँज और मीठी यादें;
हंस देती हूँ फिर से मैं ,
याद करती हूँ फिर वोह बातें!!

This blog is about my motherhood which is a bundle of beautiful moments. Each is a special gift by my daughter Sehar.